पंचायत मुख्यालय छोड़ आश्रित गांव में बना दिया अटल डिजिटल सेवा केंद्र।

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भीमपुर के ग्रामीणों ने उठाए निर्माण स्थल पर सवाल।

इंजीनियर बोले- मैंने लेआउट नहीं किया, सरपंच ने अपने हिसाब से कराया निर्माण।

तखतपुर। शासन की मंशा है कि ग्रामीणों को डिजिटल और शासकीय सेवाओं के लिए गांव से बाहर भटकना न पड़े। इसी उद्देश्य से प्रदेश की चयनित ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। शासन के अनुसार इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग, बीमा, पेंशन, बिजली बिल भुगतान, प्रमाण पत्र सहित विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का लाभ पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराया जाना है।
लेकिन तखतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भीमपुर में अटल डिजिटल सेवा केंद्र के निर्माण को लेकर ही सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस केंद्र का लाभ ग्राम पंचायत के लोगों को सहज रूप से मिलना चाहिए था, उसका भवन पंचायत मुख्यालय भीमपुर में बनाने के बजाय आश्रित गांव रामहेपुर में बना दिया गया है। इससे शासन की योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।

3000 की आबादी वाले भीमपुरी को छोड़ 150 आबादी वाले रामहेपुर में निर्माण।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत भीमपुर मुख्यमार्ग पर स्थित आसपास का एक बड़ा ग्राम पंचायत है जिसकी आबादी करीब 3000 है, जबकि वहां से करीब तीन किलोमीटर दूर जंगल में स्थित आश्रित गांव रामहेपुर की आबादी लगभग 150 बताई जा रही है। ग्राम पंचायत का पंचायत भवन भी भीमपुर में स्थित है। जहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि अटल डिजिटल सेवा केंद्र के लिए पंचायत मुख्यालय अथवा ग्रामीणों की पहुंच वाले स्थान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। परंतु सरपंच ने लोगों की सुविधाओं को दरकिनार कर दूर गांव में बना दिया

ग्रामीणों का कहना है कि भीमपुर पंचायत मुख्यालय होने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए आते-जाते हैं। यदि डिजिटल सेवा केंद्र भी पंचायत भवन के आसपास बनाया जाता तो पंचायत क्षेत्र के अधिक से अधिक ग्रामीणों को इसका लाभ आसानी से मिल सकता था। परंतु इसके लिए ना तो सरपंच ने ध्यान दिया और ना ही विभागीय अधिकारियों ने।

योजना का उद्देश्य ही ग्रामीणों की पहुंच आसान करना
अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों को शुरू करने के पीछे शासन का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके गांव में ही डिजिटल एवं शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए तहसील, जिला या बैंक तक जाने की जरूरत न पड़े। शासन के आधिकारिक विवरण में भी इन केंद्रों को ग्रामीणों तक सेवाएं पहुंचाने की पहल बताया गया है।
ऐसे में यदि ग्राम पंचायत के मुख्य आबादी वाले हिस्से के बजाय कम आबादी वाले आश्रित गांव में केंद्र स्थापित किया जाता है और वहां पहुंचने में ग्रामीणों को परेशानी होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि योजना की मूल भावना और ग्रामीणों की सुविधा को निर्माण स्थल तय करते समय कितना ध्यान में रखा गया।

इंजीनियर बोले- मेरे द्वारा नहीं किया गया लेआउट

निर्माण स्थल को लेकर जब संबंधित इंजीनियर देवेंद्र राजपूत से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा उक्त भवन का लेआउट रामहेपुर में नहीं किया गया है। उनके अनुसार सरपंच द्वारा अपने स्तर पर नाप कर भवन का निर्माण कराया गया है। जिसके कारण उसका अभी मूल्यांकन भी नहीं किया हु।
इंजीनियर के इस बयान के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि तकनीकी अधिकारी द्वारा स्थल का लेआउट नहीं किया गया तो फिर भवन निर्माण के लिए स्थल का निर्धारण किस आधार पर किया गया और इसकी स्वीकृति किस स्तर से मिली, यह जांच का विषय बन गया है।

सरपंच ने बताया- भीमपुर में स्थल नहीं था

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वहीं जब इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच योगेंद्र साहू से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि ग्राम पंचायत भीमपुर में स्थल उपलब्ध नहीं होने के कारण अटल डिजिटल सेवा केंद्र का भवन रामहेपुर में बनाया गया है। सरपंच के इस तर्क और इंजीनियर के बयान के बीच भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। जबकि वहीं ग्रामीणों का कहना है कि भीमपुरी में उक्त भवन बनाने भूमि स्थित है। और यदि भीमपुर में उपयुक्त शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं भी थी तो क्या पंचायत स्तर पर अन्य उपयुक्त स्थल तलाशने का प्रयास किया गया? क्या निर्माण से पहले संबंधित तकनीकी अधिकारी से स्थल का परीक्षण और लेआउट कराया गया? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।

शासन की राशि के उपयोग पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि अटल डिजिटल सेवा केंद्र आम जनता की सुविधा के लिए शासन की राशि से बनाया गया है। ऐसे में भवन का निर्माण ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां अधिक से अधिक ग्रामीण आसानी से पहुंच सकें। यदि केंद्र ऐसी जगह बना दिया गया जहां पंचायत की मुख्य आबादी को पहुंचने में परेशानी हो, तो सरकारी राशि से तैयार की गई सुविधा का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाने की आशंका है। मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि भवन निर्माण के लिए स्थल का चयन किस अधिकारी या एजेंसी की अनुशंसा पर किया गया, क्या तकनीकी स्वीकृति और लेआउट निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उपयोगिता का परीक्षण किस स्तर पर किया गया।

जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति

ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा है कि पंचायत मुख्यालय से दूर केंद्र बनाए जाने के कारण ग्रामीणों को भविष्य में डिजिटल सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। उनका कहना है कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचाने के बजाय यदि निर्माण स्थल का चयन सुविधा को ध्यान में रखे बिना किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब देखने वाली बात होगी कि जनपद पंचायत और संबंधित विभाग इस मामले में निर्माण स्थल, लेआउट, स्वीकृति प्रक्रिया और शासकीय राशि के उपयोग की जांच करते हैं या नहीं। यदि निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई और आवश्यक सुधार की जरूरत होगी।

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